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Tuesday, 18 October 2011

love and lost

महक फूलो की कभी भी कम ना होगी                          
खुशबू आती रहेगी तेरे जाने के बाद भी
और आखो से आंसुओ की बारिश भी कम ना होगी 

उनकी वफ़ा को समझा था हमने किस्मत अपनी 
और अब उनकी बेवफाई से हमको उल्फत भी ना होगी 

भीड़ में थामा था तुमने हाथ जब मेरा 
उस वक़्त की शायद आज तुमको कीमत ना होगी 

तुम खुश रहना , मै ना आऊंगा लौट के तुम्हारी जिंदगी में दोबारा
लगा लूँगा मौत को गले, और देखो, किसी को शिकायत भी ना होगी !


9 comments:

  1. Geeta ji,

    kya baat hui........Itna dukhi ho ke kyo likha ??

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  2. manoj ji dukhi nahi hu mai aise hi likh diya ye to

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  3. तुम खुश रहना , मै ना आऊंगा लौट के तुम्हारी जिंदगी में दोबारा
    लगा लूँगा मौत को गले, और देखो, किसी को शिकायत भी ना होगी !
    kuch udaasi hai- jane kiski

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  4. बहुत बढ़िया प्रस्तुति ||

    बधाई स्वीकारें ||

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  5. निकले अगर भडास तो, बढती जीवन साँस ||
    आँसू बह जाएँ अगर, कमे दर्द-एहसास ||

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  6. कितनी निराशा क्यों ...

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  7. अरे गीता जी खुश्बू महक ..प्रेम मिलन जुदाई तक तो ठीक था लेकिन अंत ...नहीं ऐसे निराशा नहीं ....
    सुन्दर रचना
    भ्रमर ५

    महक फूलो की कभी भी कम ना होगी
    खुशबू आती रहेगी तेरे जाने के बाद भी

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  8. my all dear friends aap sabhi ki comments ke liye boht b thanks aur ha mai bilkul bhi udaas nahi hu , bas rachna apne aap hi aisi ho gai , agli baar se promise ashawadi kavita likhne ki kosish karungi

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  9. रचना चर्चा-मंच पर, शोभित सब उत्कृष्ट |
    संग में परिचय-श्रृंखला, करती हैं आकृष्ट |

    शुक्रवारीय चर्चा मंच
    http://charchamanch.blogspot.com/

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